Sunday, March 21, 2010

पर रात अभी बाकि थी

तारें दूब रहे थे
हवा शांत हो चली थी
रात की शयाही घनी हो चली थी
पर रात अभी बाकि थी

पलके बंद हो चली थी
सांसे मध्यम हो चली थी
शरीर सिथिल हो चला था
पर रात अभी बाकि थी

सपने टूट चुके थे
साथी बिछुड़ चुके थे
आंसू थम चुके थे
पर रात अभी बाकि थी

कंहा गएँ सितारे मेरे शहर से

शहर से दूर
एक रात बिताइ गांवं में
सितारों से भरा था आकाश
जगमग जगमग कर रहे थे
तारे आकाश में

क्यों यह शहrओं में नहीं दिखातें
मैंने पूछा तारों से

एक तारा बोला
हम तो शहर में भी दिखाते
पर आपने शहर को इतना गन्दा किया की
वहां आने का मन नहीं करता
गली गली में कचरा है
हवाओं में धूआ ही धूआ
दम लेने को भी हवा नहीं
अब आप ही बातें हम शहर में क्यों आय .......
अब समझा की कंहा गएँ सितारे मेरे शहर से

Tuesday, March 16, 2010

हवाई जहाज़ का सफ़र

हवाई जहाज़ का सफ़र एक महंगा सफ़र
कहते है हवाई सफ़र सस्ता हो गया
पर फिर भी प्लेन खाली रहते है
आम आदमी तो अभी भी प्लेन में
जाने को सोच भी नहीं सकता

प्लेन में उद्गोशाना होती है की
अपने मोबाइल बंद कर दो
पर देखो लोग अभी भी फ़ोन पर बात कर रहें है
एसा लगता है की मोबाइल में इनकी जान अटकी हुई है

यह कैसी विडम्बना है की प्लेन की उतारते ही मोबाइल चालू हो जाते है
उदघोशना होती रहती है मोबाइल बंद रखने की
पर यह पैसे वाले मुसाफिरो को तो अपने बातो से कांह फुस्र्सत
और यहकैसा मजाक मोबाइल पर यह कहते है की
मैं आगया
जैसे की १० मिनट बाद यही बात नहीं कही जा सकती

और भी तमाशा देखो, प्लेन की नीच उतरते ही,
यह सब पैसेवाले यह मुसाफिर अपने अपने सामान के साथ
ऐसे उतरने की जल्दी करते है की
जैसे की प्लेन नहीं मुंबई की लोकल हो
क्या बोले इन पैसेवालों को
काश पैसे की साथ साथ इनको भगवान् इंतज़ार करना भी सिखा देता
काश इंतज़ार करने का सबक भी पैसे से मिल जाता
तो कितना अच्छा होता ..........

Monday, March 15, 2010

जीवन से भरी तेरी ऑंखें

जीवन से भरी तेरी ऑंखें
मजबूर करे जीने के लिए जीने के लिए
सागर भी तरसते रहते है
तेरा रूप का रस पिने की लिए पिने की लिए
जीवन से भरी ......
तस्वीर बनाये क्या कोई
क्या कोई लिखे तुझे पे कविता
रंगों छंदों में समाइय्गी
किस तरह से इतनी सुन्दरता सुन्दरता
एक धड़कन है तू दिल के लिए
एक जान है तू जीने के लिए जीने के लिए
जीवन से भरी .......
मधुबन की सुन्गंद है सासों में
बांहों में केवल की कोमलता
किरणों का तेज है चहरे पे
हिरनों सी है तुज में चंचलता चंचलता
आँचल का तेरे एक तार बहुत
कोई चाक जिगर सीने के लिए सीने के लिए
जीवन से भरी .........................

Sunday, March 14, 2010

इंतज़ार

मैं उनके फ़ोन को इंतज़ार करता रहा
वो मेरे फ़ोन का इंतज़ार करते रहे
हम दोनों एक दुसरे के फ़ोन का इंतज़ार करते रहे
इंतज़ार करते करते इंतज़ार इंतज़ार होगया
न मैं फ़ोन किया न उन ने फ़ोन किया
और धीरे धीरे इंतज़ार बढता ही गया
इंतज़ार इतना बडगया की
आपस की दूरिया भी बढती ही चली गयी
वो हमसे दूर हो गए हम उनसे दूर हो गए
अब तो सिर्फ यादें ही इंतज़ार बनके रहे गयी
इंतज़ार को इंतज़ार न बने दो दोस्त
नहीं तो कल को यही इंतजार

इंतजार बन के दिल को रुलाता रहेज़ेगा

Right Yaaa Wrong My review.

Today I saw movie Right Yaaa Wrong. I liked the movie. The best part of the movie is that it keeps you in your seat and made me keep guessing what is next.........
Sunny Deol acted very good. But the best role played was by Irfan Khan. He was supreup. Konkan Sen had very little role, but she acted very well. Her face expression in the end when came to know the truth, was excellent. She should have been given much more role in the movie.
Good movie.
Should be seen at least once...........
I Don't mind to see it again.........

Saturday, March 13, 2010

When two couple meet

When two couple meet what they see????????????

Any guess.................

A lady see other lady's dress, saree, jewellery, make up, hair design etc etc.....

A man see other man's wife..............

What do you say??????????????

Your comments are welcome...............