Friday, March 12, 2010

सुहाना मोसम

कल रात से ही नागपुर का मोसम बहुत सुहाना हो गया था।
सारी रात बिजली चमकती रही, बरसात होती रही।
सुबह सुबह मोसम बहुत ही शानदार था
मैने अपने साइकिल ली और बारिश में भीगते भीगते तेलान्कड़ी लेके पर निकल गया।
हवाएँ इतनी तेज चल रही थी की साइकिल चलने में बहुत मुश्किल हो रही थी,
पर फिर भी साइकिल चलते चलते में तेलान्कड़ी लेके पर गया।
तेलान्कड़ी लेके में पानी का स्तर ऊपर हो गया था।
तेज हवाओं और बारिश से मेरी साइकिल डगमगा रही थी,
पर धीरे धीरे में चलता रहा चलता रहा। लेके का नज़ारा देखते ही बनता था।
बादलों के कारन अभी भी अँधेरा था, सूरज की लालिमा अभी तक धरती पर नहीं आयें थी
बिच बिच में बिजली चमक रही थी। लगा की भगवान् लाइट जलाकर मुझे देख रहा था ।
में बहुत ही खुश था nature के इस नज़ारे को देख कर।
मेंने मन ही मन में प्रभु को धन्यवाद किया और धीर धीर घर को लौटा आया।

Thursday, March 11, 2010

हम दुखी क्यों रहेते है?????????????

एक बार दो औरतें आपस में बातें कर रहें थी।
एक औरत ने दूसरे औरत से पूझा तुम्हारी बेटी और दामाद कैसा है।
इस पर दूसरी औरत बोली की मेरी बेटी तो बहुत ही नसीब वाली है क्योंकि बेटी का पति हर को काम उसकी बेटी से पूछ कर ही करता है।
फिर उस से उसकें बेट के बारे में पूझा तो इसपर वो झलाकर बोली मेरा बेटा तो अपनी बीबी को गुलाम है। वह वोही करता जो उसकी बीबी करने को कहती है।

अब देखो हम कितनी ज़ल्दी बदल जाते है। हम वो ही करना चहतेहै जो हम को पसंद हो। हम परिस्तियो को अपने हिसाब से बदल लेतें है। क्या यही कारन तो नहीं की हम दुखी रहते है। हम अपने आप को बदलना नहीं चहते पर दुसें बदल जाएँ यही चाहतें है और इस कारन से हम दुखी रहतें है..................

Why we take gentlemen for granted?????

I have been observing that we behave with a person who is arrogant, strict, egoist very nicely whereas we take the person who is through gentleman, lenient, harmless, for granted. It applies at all level whether at home front, or friend circle or in the office.

When the boss is very strict, shrewd, good task master, we are very particular in responding to him. We attend office on time. We submit report on time. We report him each and every thing. But when the boss is otherwise who is lenient, harmless, we take all liberties like coming late to office, delay in submitting report etc. The same thing applies to friends also. We take some of the friends who are nice and sober for granted. Even while dealing with the public the same is applicable. The person who is trouble maker or fights on small issue etc are attended on priority. Such persons' choices are also taken care every time. But the other persons are squarely ignored. Is is not true?????????????

What is your opinion about it!!!!!!!!!!

Tuesday, March 9, 2010

पल पल दिल के पास तुम रहती हो

पल पल दिल के पास तुम रहती हो
जीवन मीठी प्यास यह कहेंती हो
पल पल दिल के पास तुम रहेती हो ----
हर श्याम आँखों पे तेरा आंचल लहेरएं
हर रात यादो की बारात लाएं
में सांस लेता हूँ तेरी खुसबू आती ही
एक महका महका सा पैगाम लती है
मेरे दिल की धड़कन भी तेरी गीत गाती है
पल पल दिल के पास तुम रहती हो .......

कल श्याम देखाता तुम्हे अपने आँगन में
जेसे कहे रहीती तुम मुझे बंध्लो बंधन में
यह कैसा बंधन है, यह कैसे सपने है
बेगाने होकर भी कोएं अपने लगते है
मैं सोच में रहता हो डर डर कें कहता हूँ
पल पल दिल कें पास तुम रहती हो ..............

तुम समझोगी कोयं इतना में तुम से प्यार करू
तुम समझोगी दीवाना मैं भी इकरार करू
दीवानों की यह बाते दीवाने जानतें है
जलने में क्या मजा है दीवाने जानते है
तुम यूं ही जलाते रहेना आ आ कर खाब्यो में
पल पल दिल कें पास तुम रहेती हो ..............

चलते चलते मेरे यह गीत याद रखना

चलते चलते मेरे यह गीत याद रखना
कभी अलविदा ना कहना कभी अलविदा ना कहना
रोतें हसतें बस यूं ही तुम गुनगुनाते रहेना
कभी अलविदा ना कहना ......

प्यार करते करते हम तुम कंही रो जायेंगे
इन्ही बहारों के अंचल में थक के सो जायेंगे
सपनो को फिर भीर तुम यूँ ही सजाते रहेना
कभी अलविदा ना कहना .....

बिच रहा में दिलबर बिछड़ जाएँ कही हम अगर
और सूनी सी लगे जीवन की यहं डगर
हम लोट आयेंगें तुम यों ही बुलाते रहेना
कभी अलविदा ना कहेना .....

दिल क्या करे जब किसी से किसी को प्यार हो जाएँ

दिल क्या करे जब किसी से किसी को प्यार हो जाएँ
जाने कांह कब किसी को किसी से प्यार को जाएँ
ऊँची ऊँची दीवारों सी इस दुनियां की रस्मे
न कुछ तेरें बस में जुली ना कुछ मेरें बस में
दिल क्या करें जब किसी को किसी से प्यार हो जाएँ .........

जैसे पर्वत पे घटा झुकतीं है
जैसे सागर से लहर उटती है
इसे किसी चहरे पे निगाहें रुकती है

जैसे पर्वत पे घटा झुकतीं है
जैसे सागर से लहर उटती है
इसे किसी चहरे पे निगाहें रुकती है

रोअक नहीं सकती नज़रो को दुनिया भर की रस्मे न
कुछ तेरें बस में जुली ना कुछ मेरें बस में

आ मैं तेरी यदा में सब को बुलादू
दुनिया को तेरी तसवीर बना दू
मेरा बस चले तो दिल चीर के दिखा दू

आ मैं तेरी यदा में सब को बुलादू
दुनिया को तेरी तसवीर बना दू
मेरा बस चले तो दिल चीर के दिखा दू

दोड़ रहा साथ लहू कें, प्यार तेरा नस नस में
न कुछ तेरे बस में, न कुछ मेंरे बस में ......

Monday, March 1, 2010

BANDRA FORT AT BANDRA WEST, MUMBAI, INDIA




Last week in the birthday party of Shobha, her PG Shobhan told about the Bandra fort. So we decided to visit the place. It is located in the bandra west near bandstand at the corner known as Land's end. There is very few ruin of bandra fort. The fort was not maintained at all. That is way only very few ruins were there. However, garden is maintained therein. It is on the bank of Arabian Sea. From the Bandra Fort, One can see the Bandra Worli Sea Link also. it is nice place for an outing in the evening.